
रायपुर। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में डिजिटल हेल्थ औरहॉस्पिटल लीडरशिप से जुड़े दो प्रमुख स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रमों कादीक्षांत समारोह संस्थान के परिसर में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट प्रोग्राम इनडिजिटल हेल्थ के तृतीय बैच तथा माइक्रो, स्मॉल एवं मीडियम हॉस्पिटल्सके फाउंडर्स एवं सीईओ के लिए एक्जीक्यूटिव लीडरशिप प्रोग्राम केद्वितीय बैच के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
ये दोनों कार्यक्रम आईआईएम रायपुर और एकेडमी ऑफ डिजिटल हेल्थसाइंसेज़ के संयुक्त सहयोग से संचालित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्यस्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करना और डिजिटल तत्परता कोबढ़ावा देना है।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. जी. वी. रमण राव, डायरेक्टर, इमरजेंसीमेडिसिन लर्निंग सेंटर (EMLC) एवं रिसर्च, जीवीके ईएमआरआई रहे।अपने संबोधन में उन्होंने आपातकालीन और उच्च प्रभाव वाले स्वास्थ्यपरिदृश्यों में सुदृढ़ नेतृत्व, डिजिटल एकीकरण और तैयारियों की बढ़तीआवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा , “भारत में सही प्रकार केनेताओं के निर्माण के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण आवश्यक है, और यहकार्यक्रम उसी दिशा में प्रभावी रूप से कार्य करता है। प्रशिक्षण का उद्देश्यप्रदर्शन में स्पष्ट सुधार होना चाहिए।”
इस अवसर पर आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीवपराशर तथा एकेडमी ऑफ डिजिटल हेल्थ साइंसेज़ के चेयरमैन एवंप्रोग्राम चेयर डॉ. राजेंद्र प्रताप गुप्ता भी उपस्थित रहे।


प्रो. संजीव पराशर ने अपने वक्तव्य में कहा कि बदलते स्वास्थ्य परिदृश्यमें प्रभावी नेतृत्व के लिए प्रबंधकीय दक्षता के साथ-साथ डिजिटल समझका होना अनिवार्य है। उन्होंने स्वास्थ्य एवं डिजिटल हेल्थ जैसे उभरते औरमिशन-क्रिटिकल क्षेत्रों में नेतृत्व विकास के प्रति आईआईएम रायपुर कीप्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, “आपकी यात्रा यहाँ समाप्त नहींहोती। यह कार्यक्रम आपके भविष्य की दिशा तय करता है।”
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था छोटे और मध्यम आकार के अस्पतालों केव्यापक नेटवर्क तथा तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टमपर निर्भर है। इसके बावजूद नेतृत्व विकास और डिजिटल हेल्थ शिक्षा केलिए संरचित अवसर सीमित रहे हैं।
पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन डिजिटल हेल्थ को इस उद्देश्य सेडिज़ाइन किया गया है कि स्वास्थ्य पेशेवरों को डिजिटल हेल्थ सिस्टम, नीति, डेटा और नवाचार की संरचित समझ प्रदान की जा सके। वहींहॉस्पिटल्स के फाउंडर्स एवं सीईओ के लिए एक्जीक्यूटिव लीडरशिपप्रोग्राम वित्त, गवर्नेंस, संचालन, मानव संसाधन प्रबंधन और तकनीकअपनाने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है, जो संस्थागत स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।
डॉ. राजेंद्र प्रताप गुप्ता ने अपने संबोधन में दीर्घकालिक प्रणालीगतपरिवर्तन और जटिलताओं के अनुरूप संस्थानों के निर्माण में नेतृत्व शिक्षाकी भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा, “यथास्थिति को कभी स्वीकार नकरें। सर्वश्रेष्ठ की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं सर्वश्रेष्ठ का निर्माणकरें।”
शैक्षणिक कठोरता, वास्तविक व्यावसायिक मामलों, व्यावहारिकदृष्टिकोण, विशेषज्ञों द्वारा संचालित सत्रों और सहकर्मी शिक्षण केसंयोजन के माध्यम से इन दोनों कार्यक्रमों ने प्रतिभागियों को व्यापकदृष्टिकोण विकसित करने, निर्णय क्षमता को सुदृढ़ करने और डिजिटलरूप से सक्षम स्वास्थ्य भविष्य के लिए अपने संस्थानों को तैयार करने मेंसहायता की है।
जैसे-जैसे भारत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और व्यापक डिजिटल हेल्थएकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इस प्रकार की पहलें स्वास्थ्यमूल्य श्रृंखला में नेतृत्व और संस्थागत क्षमता को सशक्त बनाने मेंमहत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डिजिटल हेल्थ के पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट प्रोग्राम के तृतीय बैच तथाहॉस्पिटल लीडरशिप प्रोग्राम के द्वितीय बैच के स्नातक अब उन स्वास्थ्यपेशेवरों और नेताओं के बढ़ते समुदाय का हिस्सा बन गए हैं, जो सुदृढ़, कुशल और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण के लिए प्रतिबद्धहैं। प्रतिभागी क्रमशः प्रमाणित डिजिटल हेल्थ प्रोफेशनल्स औरप्रमाणित हॉस्पिटल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के रूप में उभरकर सामनेआए हैं।

