राज्यपाल को प्रदेश के वरिष्ठ चिकित्सकों ने लिखा पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों एवं मरीजों के हितों की रक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना वापस लेने की माँग करते हुए प्रदेश के वरिष्ठ चिकित्सकों डॉ. महेश सिन्हा, डॉ. ललित शाह, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. आशा जैन, डॉ. यशवंत चंद्रवंशी ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य मेडिकल काउंसिल के सदस्य होने के नाते छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से स्वास्थ्य विभाग द्वारा 11 जून 2026 को जारी अधिसूचना क्रमांक GENS – 14/18/2026 – HEALTH SECTION – 1 के विषय में ध्यान दिलाना चाहते हैं –
1. उक्त अधिसूचना छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (CGMC) की वैधानिक एवं नियामक भूमिका को कमजोर कर सकती है तथा राज्य में चिकित्सा व्यवसाय के नियमन, चिकित्सकीय जवाबदेही एवं जन-सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। यही स्थिति राज्य में नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भी है। बाहरी राज्यों में पंजीकृत स्टाफ बिना किसी दस्तावेजी जांच के छत्तीसगढ़ में कार्य करने के लिए अधिकृत हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ नर्सेज रजिस्ट्रेशन कौंसिल और छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल कौंसिल की वैधानिक और नियामक स्थिति भी इस अधिसूचना से लगभग समाप्त हो रही है।
2. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर (NMR) एवं राज्य चिकित्सा परिषदों की भूमिकाएं परस्पर पूरक हैं। किसी चिकित्सक का राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण होना राज्य चिकित्सा परिषद की नियामक एवं अनुशासनात्मक शक्तियों का विकल्प नहीं हो सकता। राज्य में चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले प्रत्येक चिकित्सक की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
3. राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर (NMR) एवं राज्य चिकित्सा परिषदों द्वारा प्रदत्त पंजीकरण को समान नहीं माना जा सकता। वर्तमान में NMR मुख्यतः राज्य चिकित्सा परिषदों द्वारा प्रदत पंजीकरणों का समेकित अभिलेख है तथा यह स्वयं राज्य पंजीकरण का विकल्प नहीं है।
इस अधिसूचना पर छत्तीसगढ़ के अन्य डॉक्टर्स संगठन ने भी अपनी आपत्ति और चिंता दर्ज की है। संगठनों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि राज्य में बिना छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराए चिकित्सकीय कार्य की अनुमति दी जाती है, तो इससे चिकित्सकीय निगरानी, शिकायत निवारण, अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा मरीजों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ( NBEMS) भारत सरकार के संस्थान ने एक परिपत्र जारी कर, चिकित्सा संस्थानों को आगाह किया है कि एडमिशन देने से पहले कड़ी जाँच की जाए ताकि फ़र्ज़ी लोग भर्ती न हो पाए. ऐसा होने पर संस्थान पर कार्रवाई और दंड आरोपित किया जाएगाअभ्यर्थियों की पात्रता का सत्यापन इन निर्धारित मानदंडों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। हाल के मामलों में यह देखा गया है कि कुछ अस्पतालों/संस्थानों ने मूल दस्तावेजों और पात्रता मानदंडों का उचित सत्यापन किए बिना उम्मीदवारों को पाठ्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी। अस्पतालों को दृढ़ता से परामर्श दिया जाता है कि वे किसी भी उम्मीदवार को प्रवेश देने से पूर्व सभी मूल दस्तावेजों का कठोर एवं सूक्ष्म परीक्षण करें तथा OPJR पोर्टल / MCC पोर्टल पर उम्मीदवार पंजीकरण, उसके आवश्यक दस्तावेजों के अपलोडिंग एवं अन्य संबंधित औपचारिकताओं हेतु निर्धारित समयसीमा का भी पालन करें। बिना उचित सत्यापन के किसी उम्मीदवार को शामिल करने से न केवल अयोग्य उम्मीदवार के प्रवेश का जोखिम उत्पन्न होता है, बल्कि संस्थान को संभावित मुकदमों के जोखिम में भी डालता है।
NBEMS के सक्षम प्राधिकारी ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। तदनुसार, यह निर्णय लिया गया है कि एनबीईएमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के उद्देश्य से आवश्यक दस्तावेज प्रदान करने में विफल रहने, या अनुमोदन, अग्रेषण, या झूठे, मनगढ़ंत, भ्रामक या असत्यापित रिकॉर्ड/दस्तावेज प्रस्तुत करने में चूक करने वाले किसी भी अस्पताल पर ऐसे प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 1,00,000 रुपये (केवल एक लाख रुपये) का मौद्रिक जुर्माना लगाया जाएगा।
रोजगार के अवसर पर भी दुष्परिणाम
छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षारत नर्स और फार्मासिस्ट इस आदेश से सीधे प्रभावित होंगे क्योंकि उनके रोजगार के अवसर बाहरी राज्यों के शिक्षा प्राप्त नर्सिंग और फार्मासिस्ट के आ जाने से निश्चित रूप से कम हो जाएंगे। अतः व्यापक जनहित को देखते हुए राज्यपाल से निवेदन किया गया है कि इस अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल की वैधानिक शक्तियों एवं राज्य के मरीजों के हितों को सुरक्षित रखा जाए।
छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार लोकभवन में ही चिकित्सक हैं वस्तुस्थिति की जानकारी प्रत्यक्ष उनसे ही ली जा सकती है।
पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ शासन, विकासशील, मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ, चेयरमैन, नेशनल मेडिकल कमीशन नई दिल्ली , टी. दिलीप कुमार, अध्यक्ष, इंडियन नर्सिंग कौंसिल, नई दिल्ली और डॉ. मोंटू कुमार एम. पटेल, अध्यक्ष, फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली को दी गई है।

