• पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन 24 राज्यों/केंद्र शासितप्रदेशों में बांस की खेती, प्रसंस्करण और विपणनकोबढ़ावा देता है।
  • यह मिशन वित्तीय सहायता, एफपीओ के गठन औरकौशल विकास के माध्यम से किसानों और एमएसएमईको सहायता प्रदान करता है।
  • एनबीएम अगरबत्ती क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और आयातपर निर्भरता कम करने में भी सहायता करता है।
  • मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और असम की सफलता कीकहानियाँ ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरणपर सकारात्मक प्रभाव दर्शाती हैं।

भारत में बांस के अंतर्गत सबसे अधिक क्षेत्रफल (13.96 मिलियनहेक्टेयर) है और 136 प्रजातियों (125 देशी और 11 विदेशी) केसाथ बांस विविधता के मामले में चीन के बाद दूसरा सबसे समृद्धदेश है। भारत के अधिकांश पहाड़ी राज्यों में, बांस का व्यापकरूप से निर्माण/भवन निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग कियाजाता है। फर्नीचर, वस्त्र, खाद्य, ऊर्जा और हर्बल औषधि जैसेउद्योगों में पारंपरिक और आधुनिक अनुप्रयोगों के साथ, अन्य देशोंमें भी इसकी मांग बढ़ रही है।

भारत का बांस और रतन उद्योग 28,005 करोड़ रुपये का है। बांसक्षेत्र की विशाल अप्रयुक्त क्षमता को ध्यान में रखते हुए, अप्रैल 2018 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति(सीसीईए) द्वारा पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) कोदेश भर में कार्यान्वयन हेतु अनुमोदित किया गया था ताकि हमारेउद्योग को आपूर्ति के लिए गुणवत्तापूर्ण और उपयुक्त प्रजातियोंकी खेती, उपचार, प्राथमिक प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा सकेताकि इसे घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनायाजा सके।

मिशन का उद्देश्य क्षेत्र-आधारित, क्षेत्रीय रूप से अलग-अलग रणनीति अपनाकर बांस क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देनाऔर बांस की खेती एवं विपणन के अंतर्गत क्षेत्रफल बढ़ाना है।मिशन के अंतर्गत, नई नर्सरियों की स्थापना और मौजूदा नर्सरियोंको सुदृढ़ बनाने में सहायता देकर गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री कीउपलब्धता बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। एकीकरण को आगेबढ़ाने के लिए, मिशन बांस उत्पादों, विशेष रूप से हस्तशिल्पवस्तुओं के विपणन को मजबूतकरने के लिए कदम उठा रहा है।पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसेराज्य के नोडल विभागों के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिन्हें संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों द्वारा नामित कियाजाता है। लाभार्थियों का चयन और सहायता प्रदान करने काकार्य राज्य बांस मिशन/राज्य बांस विकास एजेंसी द्वारा किया जारहा है, जो मिशन के कार्यान्वयन के लिए राज्य/संघ राज्य क्षेत्रनोडल विभाग में कार्यरत हैं। वर्तमान में यह योजना 24 राज्यों/संघराज्य क्षेत्रों में कार्यान्वित की जा रही है।

राष्ट्रीय बांस मिशन की उपलब्धियां

31 दिसंबर, 2024 तक पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन की भौतिकप्रगति इस प्रकार है:

14 मान्यता प्राप्त नर्सरियों सहित 408 बांस नर्सरियां स्थापितकी गई हैं।

60,000 हेक्टेयर गैर-वनीय क्षेत्र बांस रोपण के अंतर्गत लायागया है।

104 बांस उपचार एवं संरक्षण इकाइयां स्थापित की गई हैं।

528 उत्पाद विकास एवं प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गईहैं।

बांस व्यापार के लिए 130 बाजार अवसंरचना सुविधाएं सृजितकी गई हैं।

राष्ट्रीय बांस मिशन की शुरुआत और विकास

राष्ट्रीय बांस मिशन 2006-07 में एक केंद्र प्रायोजित योजना(सीएसएस) के रूप में शुरू किया गया था और 2014-15 केदौरान इसे एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) केअंतर्गत शामिल कर लिया गया और 2015-16 तक जारी रहा।इसके बाद, केवल एनबीएम के तहत पहले लगाए गए बांस केबागानों के रखरखाव के लिए ही धनराशि जारी की गई। हालांकि, यह मुख्यतः बांस के प्रसार और खेती तक ही सीमित था, जिसमेंसीमित सीजनिंग और उपचार इकाइयाँ और बांस बाजार थे।

भले ही, एनबीएम ने वन और गैर-वन दोनों क्षेत्रों में बांस के क्षेत्रोंको बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन इस योजना कीमुख्य कमजोरी उत्पादकों (किसानों) और उद्योग के बीच संपर्ककी अनुपस्थिति, एक मजबूत मूल्य संवर्धन घटक और सहकारीसमितियों, एसएचजी, जेएलजी आदि जैसे संस्थानों के माध्यम सेएकत्रीकरण के लिए बांस किसानों को संगठित करने में कमजोरप्रयास थे। इसलिए, तब जोर व्यावसायिक रूप से आवश्यकप्रजातियों के बांस के गुणवत्ता वाले बागानों के प्रचार-प्रसार, उत्पाद विकास और मूल्य संवर्धन, प्राथमिक प्रसंस्करण औरउपचार सहित; सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ-साथ उच्चमूल्य वाले उत्पादों; बाजारों और कौशल विकास पर केंद्रित था, इस प्रकार, बांस आधारित उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बांसक्षेत्र के विकास के लिए एक पूर्ण मूल्य श्रृंखला सुनिश्चित करना, जिसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ेगा।

बांस क्षेत्र के समग्र विकास को सक्षम बनाने के लिए पुनर्गठितमिशन में निम्नलिखित मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा है:

1. अंतर-क्षेत्रीय तालमेल:

पुनर्गठित एनबीएम विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और एनसीडीसीजैसे संगठनों के प्रयासों के समन्वय हेतु एक साझा मंच के रूप मेंकार्य कर रहा है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर बांस सेसंबंधित गतिविधियों का बेहतर एकीकरण सुनिश्चित हो रहा है।

2. उत्पादकता में वृद्धि:

गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, उन्नत कृषि पद्धतियों और अनुसंधानएवं विकास सहायता को बढ़ावा देकर मांग-आपूर्ति के अंतर कोपाटने के प्रयास चल रहे हैं। पेरिस समझौते के तहत भारत केजलवायु लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए उच्च कार्बन-अवशोषितबांस की किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

3. स्वदेशी उपकरण एवं प्रौद्योगिकियां:

भारतीय बांस प्रजातियों के अनुकूल उपकरण और मशीनरीविकसित करने के लिए अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों कोप्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कटाई के बाद होनेवाले नुकसान को कम करना और सामुदायिक और औद्योगिकदोनों स्तरों पर प्रसंस्करण दक्षता को बढ़ाना है।

4. उत्पाद विकास एवं विपणन:

बांस उत्पाद डिज़ाइन, मूल्य संवर्धन, भंडारण, प्राथमिकप्रसंस्करण, कौशल विकास और बाज़ार संपर्कों में नवाचारों कोसक्रिय रूप से अपनाया जा रहा है।

5. उद्योग विकास के लिए नीतिगत समर्थन:

किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने में बांसक्षेत्र की क्षमता को पहचानते हुए, इसके विकास में तेजr लाने केलिए नीतिगत प्रोत्साहन लागू किए जा रहे हैं।

6. निर्माण में बांस को बढ़ावा देना:

स्कूलों, स्वास्थ्य सेवा केंद्रों, रेलवे और बैरकों जैसी सरकारीनिर्माण परियोजनाओं में बांस के उपयोग को अनिवार्य बनाने केलिए कदम उठाए जा रहे हैं। इससे पर्यावरण के अनुकूल, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिल रहा है और बांस उत्पादों कीमांग बढ़ रही है।