श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

शास्त्रों के अनुसार गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां पर देवताओं द्वारा बनवाया गया एक पवित्र कुंड भी है जिसे सोमकुण्ड या पापनाशक तीर्थ कहते हैं। भोलेनाथ के इस पावन तीर्थ के बारे में मान्यता है कि यह हर काल में यहीं मौजूद रहता है। आराधना से जन्म-जन्मांतर के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

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श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता हैं और सभी मनोरथों को प्राप्त करता है । यह 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से द्वितीय ज्योतिर्लिंग है, जो आंध्रप्रदेश के श्रीशैलम में स्थित है। इसे दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है। यह स्थान भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का प्रतीक है, जहां वे अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने के लिए आए थे।

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श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर की पूजा करने से भक्तों को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। मध्य प्रदेश के उज्जैन  में स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पूरे विश्व में एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो कि दक्षिणाभिमुखी हैं। जो भक्त महाकालेश्वर की आराधना करते हैं, वे समय और मृत्यु के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं और उन्हें भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

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श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के बीच स्थित मांधाता द्वीप पर स्थित है, जिसे शिवपुरी भी कहा जाता है। इस द्वीप का आकार पवित्र ॐ (ओम) के प्रतीक जैसा है, जो इसे और भी आध्यात्मिक और पवित्र बनाता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करने से भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और शांति मिलती है।

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श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में है। शिव जी के इस धाम का इतिहास भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण, पांडव और आदिगुरु शंकराचार्य से जुड़ा है। यह मंदिर हिमालय क्षेत्र में है, इस वजह से शीत ऋतु के समय करीब 6 महीने बंद रहता है और ग्रीष्म ऋतु के समय भक्तों के लिए खोला जाता है।

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श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

12 ज्योतिलिंर्गों में से छठा ज्योतिर्लिंग है भीमााशंकर जो महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 110 किलोमीटर दूर शिराधन गांव में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की शक्ति और उनके भक्तों के प्रति उनकी करुणा का प्रतीक है। यह ज्योतिर्लिंग इस बात का प्रतीक है कि सच्चे भक्तों की रक्षा के लिए भगवान शिव सदैव तत्पर रहते हैं।

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श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

उत्तरप्रदेश के वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है। शिव पुराण के अनुसार, यह भगवान शिव का निवास स्थान है, जहां वे अपने भक्तों को पापों से मुक्त करते हैं और उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं।

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श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर त्र्यंबक गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम त्र्यंबकेश्वर इसलिए पड़ा क्योंकि ये तीन पहाड़ों ब्रह्मगिरी, नीलगिरी और कालगिरी से घिरा हुआ है। साथ ही, गोदावरी नदी यहां से शुरू होती है, जो इसे और भी खास बनाती है।

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श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

झारखंड राज्य के मध्य में स्थित पवित्र शहर देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम स्थित है। यह पवित्र स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भगवान शिव के तेजस्वी रूप का प्रतिनिधित्व करने वाले 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसके अलावा, इसे देवी सती की दिव्य शक्ति से जुड़े 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। शिव और शक्ति का यह अनूठा संगम बाबा बैद्यनाथ धाम को अद्वितीय तीर्थस्थल बनाता है।

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श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

गुजरात में द्वारका के समीप स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को विशेष सुरक्षा प्रदान करने वाला ज्योतिर्लिंग माना गया है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से भक्तों की सभी विपत्तियाँ समाप्त होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।

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श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

तमिलनाडु राज्य में रामनाथपुरम जिले के रामेश्वरम में स्थित है रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।इसकी स्थापना भगवान राम ने की थी और सबसे पहले पूजा की थी। रामेश्वरम मंदिर करीब 1000 फुट लंबा और 650 फुट चौड़ा है। इसका प्रवेश द्वार 40 मीटर ऊंचा है।

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श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित है। यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग मंदिर है जहां भगवान शंकर का पूरा परिवार एक ही मूर्ति में विराजमान है, जिसमें भगवान शिव, देवी पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय नंदी पर विराजमान हैं और भगवान शंकर ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया हुआ है।

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